हरियाणा में मौसम विभाग का पूर्वानुमान, 4 अक्टूबर तक मौसम रहेगा परिवर्तनशील

हरियाणा में मौसम विभाग का पूर्वानुमान, 4 अक्टूबर तक मौसम रहेगा परिवर्तनशील

हरियाणा में मौसम विभाग का पूर्वानुमान, 4 अक्टूबर तक मौसम रहेगा परिवर्तनशील

News Josh Live, 30 Sept, 2020

हरियाणा राज्य में मॉनसून 26 जून को सक्रिय हुआ परन्तु जुलाई में राज्य में सामान्य बारिश (156.8मिलीमीटर) से 6%ज्यादा (166.3 मिलीमीटर) बारिश हुई जिसमें 11-12जुलाई, 20-21जुलाई व 28-29जुलाई को राज्य में ज्यादातर क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। अगस्त मास में राज्य में सामान्य बारिश (159.5 मिलीमीटर) से 13% कम बारिश(138मिलीमीटर) दर्ज की गई जिसमें से अच्छी बारिश 10 से 12 अगस्त तथा 18 से 20 अगस्त को राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में दर्ज की गई। परन्तु सितम्बर में बारिश सामान्य से भी कम बारिश दर्ज की गई ।

पूरे मॉनसून पीरियड (1जून से 29 सितंबर) में भारत मौसम विज्ञान विभाग में दर्ज आंकड़ों के अनुसार हरियाणा राज्य में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज हुई है। इस दौरान राज्य में सामान्य बारिश 443.1 मिलीमीटर की जगह 377.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। मॉनसून की असमान बारिश होने के कारण राज्य के पन्द्रह जिलों में सामान्य से भी कम बारिश दर्ज हुई जिनमे मुख्य पंचकूला (-65%), रोहतक (-57%),भिवानी (-43%) महेंद्रगढ़ (-37%), अम्बाला (-35%),जींद (-29%),, रेवाडी (-26%), पलवल(-25%), पानीपत (-22%),
हिसार (-19%), यमुनानगर(-17%), सोनीपत (-11%) ,मेवात (-9%), झज्जर (-3%), फरीदाबाद (-2%) तथा राज्य के बाकी जिलों में सामान्य या अधिक वर्षा आंकी गई है।

मॉनसून की वापसी कल 28 सितम्बर को सामान्य तिथि (17 सितम्बर) से 11 दिन बाद पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो गई है जो अगले 2-3 दिनों में हरियाणा राज्य से इसकी वापसी सुनिश्चित हो जाने की संभावना है।

मौसम पूर्वानुमान:-

मॉनसून की वापिसी की संभावना को देखते हुए तथा जम्मू कश्मीर पर एक कमजोर पश्चिमीविक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण राज्य में 4 अक्तूबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है इस दौरान हवाये उत्तर पश्चिमी चलने तथा बीच बीच में आंशिक बादल आने की भी संभावना है जिससे राज्य में दिन व रात्रि तापमान में हल्की गिरावट संभावित।

मौसम आधारित कृषि सलाह

1. सरसों की बिजाई से लिए भूमि को अच्छी प्रकार से तैयार कर नमी सरंक्षित करे तथा उन्नत किस्मों आरएच 725, आरएच 749, आरएच 30 व अन्य उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीजों का प्रबंध करे ताकि तापमान अनुकूल होने पर चार-पांच दिन बाद बिजाई शुरू की जा सके। तना गलन रोग से बचाव के लिए  सरसों की बिजाई  से  पहले  2 ग्राम कारबेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से बीजोपचार अवश्य  करें।
2. परिवर्तनशील व खुश्क मौसम की संभावना को देखते हुए पछेती धान की फ़सल में रोग व कीट आने की संभावना ज्यादा रहती है तथा इसलिए किसान भाई फसल की निगरानी करते रहे तथा विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार आवश्यकतानुसार स्प्रे आदि करे।
3.  मौसम परिवर्तनशील व खुश्क रहने की संभावना देखते हुए सब्जियों व फलदार पौधों तथा हरे चारे की फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करे।

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डॉ मदन खीचड़
विभागाध्यक्ष
कृषि मौसम विज्ञान विभाग, चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार

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