हरियाणा में आशा वर्करों की नियुक्ति सम्बंधित नियमों में हुआ बदलाव, देखिए नए नियम

हरियाणा में आशा वर्करों की नियुक्ति सम्बंधित नियमों में हुआ बदलाव, देखिए नए नियम

हरियाणा में आशा वर्करों की नियुक्ति सम्बंधित नियमों में हुआ बदलाव, देखिए नए नियम

News Josh Live, 01 Nov, 2020

आशा वर्करों के अदम्य प्रयासों के चलते हरियाणा स्वास्थ्य विभाग आशा नामांकन, चयन, कार्य, भुगतान और छंटनी मानदंडों में ऑवरहोलिंग (आमूलचूल परिवर्तन) कर रहा है।

इस संबंध में विवरण सांझा करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में 20,268 आशा वर्करों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नामांकित किया गया है और उन्हें देश में अधिकतम प्रोत्साहन मिल रहा है क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के अलावा राज्य के बजट से राज्य सरकार ने उनके लिए व्यापक प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान भी किया है। अरोड़ा ने आगे बताया कि आशा वर्करों की नामांकन प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष रूप से संहिताबद्ध किया गया है। इसके अलावा, आशा वर्करों के नामांकन, कार्य, भुगतान और छंटनी मानदंडों को पूरा करने हेतू कई बदलाव भी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा की हाल ही में आयोजित शासी निकाय की बैठक में चयन मानदंडों को संशोधित किया गया है, जिसमें न्यूनतम प्रदर्शन बेंचमार्क और आशा वर्कर की आयु आधारित नामांकन शामिल किए गए हैं । यह बैठक मुख्य सचिव, विजय वर्धन की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। संशोधित मानदंड पर विस्तार से चर्चा करते हुए अरोड़ा ने बताया कि आशा वर्करों की नामांकन प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष रूप से संहिताबद्ध किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा के मिशन निदेशक प्रभजोत सिंह ने बताया कि आशा-पे ऐप या पोर्टल के लागू होने के बाद सभी स्तरों पर आशा प्रोत्साहन भुगतान की निगरानी की जाएगी। आशा वर्कर अपने भुगतान और कटौती (यदि कोई हो) की स्थिति के बारे में भी जान सकेंगे। आशा वर्कर के चयन मानदंड और आयु-आधारित नामांकन के संशोधन के बारे में विस्तार से चर्चा के बाद, आशा वर्करों की न्यूनतम योग्यता कक्षा 10वीं पास के रूप में तय की गई है, (मेवात विकास प्राधिकरण के तहत आने वाले क्षेत्र को छोडक़र जैसा कि जिला नूंह और पलवल के ब्लॉक हथीन के लिए जहां न्यूनतम योग्यता कक्षा 8वीं पास होगी)।

इसके अलावा, आशा वर्कर के नामांकन की आयु सीमा 25 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और 01 अप्रैल, 2021 से प्रभावी 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद आशा कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।

राज्य में नए आशा वर्कर के नामांकन के लिए अपनाए जाने वाले चयन मानदंडों का विवरण सांझा करते हुए प्रभजोत सिंह ने कहा कि अंकों की वरीयता शैक्षिक योग्यता के अनुसार दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, कक्षा 10वीं पास को शून्य अंक की वरीयता मिलेगी जबकि स्नातक या इससे अधिक अंक पाने वाले को 4 अंक मिलेंगे। उन्होंने आगे बताया कि निवास स्थान के लिए अंक आवंटित किए जाएंगे, यदि आशा वर्कर उसी इलाके से हैं, जहां उन्हें कार्य करना है, तो उन्हें 4 वरीयता अंक दिए जाएंगे, जबकि आशा वर्कर जो उप-केंद्र को कवर करने वाले क्षेत्र की निवासी हैं, को एक अंक की वरीयता दी जाएगी।

नामांकन के लिए आशा वर्करों की आयु सीमा भी 25 वर्ष से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि आशा वर्कर जो विधवा है, तलाकशुदा है, अलग है, अविवाहित है उसे 2 अंकों की वरीयता मिलेगी। इसके अलावा, आर्थिक स्थिति और संचार कौशल के लिए 4 अंकों की अतिरिक्त वरीयता दी जाएगी।

इसके अलावा, आशा वर्कर की अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष निर्धारित की गई है। मिशन निदेशक ने आगे बताया कि आशा वर्कर जो सरपंच या पंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या हेल्पर हैं, निजी नर्सिंग होम या स्कूल आदि में सहायक स्टाफ के रूप में काम करते हैं, को भी चिन्हित करने की आवश्यकता होती है और उन्हें केवल एक ही स्थान के लिए अनुमति दी जानी चाहिए, या तो आशा वर्कर या कोई और कार्य हेतू। इस उदेश्य के लिए, सभी मौजूदा और नए आशा वर्करों को अपनी स्थिति के बारे में अपने एमओ-आईसी, पीएचसी को अपने स्तर के बारे अंडरटेकिंग प्रस्तुत करनी होगी कि वे विशेष रूप से केवल आशा वर्कर के रूप में काम कर रहे हैं।

अनुपस्थित रहने वाले आशा वर्करों की नीति को सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय अधिकारियों को लिखित सूचना के बिना तीन महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाली आशा वर्कर को औपचारिक नोटिस के तुरंत बाद चिन्हित करके भारमुक्त कर देना चाहिए। यहां तक कि 3 महीने तक के अनौपचारिक मातृत्व अवकाश के मामले में, आशा वर्कर को संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में अनुमोदित करवाना आवश्यक होगा।

अनौपचारिक मातृत्व अवकाश के दौरान, राज्य बजट से निर्धारित मासिक मानदेय ऐसे आशा वर्कर को दिया जाएगा। आशा वर्करों की छंटनी पर विस्तार से उन्होंने बताया कि उनके महत्वपूर्ण योगदान और प्रतिबद्धता का संज्ञान लेते हुए 20 हजार रूपए का नकद प्रोत्साहन, भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ ऐसे आशा वर्कर के लिए भी अनुमोदित किया गया है, जो एनएचएम में न्यूनतम 10 वर्षों के बाद कार्यक्रम छोडऩे या चुनने का विकल्प चुनते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि नई आशा वर्कर का चयन अब संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य में मौजूदा चयन प्रक्रिया के अनुसार सामुदायिक परामर्श के माध्यम से चिन्हित किए जाने वाले केवल प्रेरित उम्मीदवारों को चुना जाए।

 

News Josh Live

यह भी पढ़ें

कुछ खास x