सरकारी अस्पताल में प्रत्येक मरीज का किया जा रहा कोरोना टेस्ट, 800 से घटकर 400 पहुंची ओपीडी

सरकारी अस्पताल में प्रत्येक मरीज का किया जा रहा कोरोना टेस्ट, 800 से घटकर 400 पहुंची ओपीडी

सरकारी अस्पताल में प्रत्येक मरीज का किया जा रहा कोरोना टेस्ट, 800 से घटकर 400 पहुंची ओपीडी

फतेहाबाद NEWS JOSH। नवंबर महीने में ठंड ने दस्तक दे दी है। ऐसे में कोरोना के मरीजों की रफ्तार भी बढ़ी है। इस महीने मरीज अधिक आने के साथ ही मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा हैं। वही स्वास्थ्य विभाग को सबसे बड़ी परेशानी का सामना यह करना पड़ रहा है कि लोग कोरोना टेस्ट नहीं करवा रहे है। मजबूरन स्वास्थ्य विभाग को फैसला लेना पड़ा है कि सरकारी अस्पताल में जो भी मरीज आएगा उसे पहले अपना कोरोना टेस्ट करवाना होगा। अगर कोई बिना कोरोना टेस्ट करवाए डाक्टर के पास पहुंच जाता है तो उसका इलाज नहीं किया जा रहा बल्कि उसे पहले कोरोना टेस्ट करवाने की सलाह दी जा रही है।

इसका सीधा असर अब अस्पताल में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। अब जिले के सरकारी अस्पताल में ओपीडी आधी हो गई है। एक समय था जब अस्पताल के अंदर हर दिन 800 ओपीडी होती थी, लेकिन अब यह ओपीडी 400 रह गई है। ओपीडी कम होने का मुख्य कारण कोरोना टेस्ट भी है। वहीं अब सरकारी अस्पताल में अनेक सुविधा जैसे ऑपरेशन व दंतों की जांच आदि नहीं हो रही है। वही दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि ओपीडी के लिए दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। वैसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आदेश है कि अगर कोराेना संदिग्ध मरीज नजर आए तो उसकी सूचना दे। लेकिन अधिकतर प्राइवेट अस्पताल संचालक ऐसा कोई संदेश अधिकारियों को नहीं दे रहे है।

रिकवरी रेट घटा, स्वास्थ्य विभाग चिंतित

अक्टूबर महीने में कोरोना का रिकवरी रेट 91 फीसद तक था। लेकिन नवंबर महीना शुरू होते ही मरीजों की संख्या अधिक बढ़ने के साथ ही एक्टिव केस भी अधिक हो गए है। यहीं कारण है कि इस समय रिकवरी रेट 86.31 फीसद है। ऐसे में 5 फीसद तक का रिकवरी रेट गिर गया है। वही अब तक फतेहाबाद खंड में सबसे अधिक कोरोना के 1040 मरीज आए है। वहीं मरने वालों का आंकड़ा भी 21 है। जिले में भट्टूकलां में सबसे पहले कोरोना का मरीज आया था। लेकिन रिकवरी रेट यहां बेहद अच्छा रहा और अब तक केवल 298 मरीज ही आए है। इस खंड में सिर्फ 2 लोगों की मौत हुई है।

जिले के लोेग लापरवाही बरत रहे है। अब तो नौबत यहां तक आ गई है कि बीमार होने के बाद भी कोरोना टेस्ट नहीं करवा रहे है। सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों का टेस्ट किया जा रहा है। नवंबर महीने में मरीज अधिक मिले है इसक कारण रिकवरी रेट भी घटा है। इसलिए सभी से अपील है कि कोरोना जिले से गया नहीं बल्कि टेस्ट कम होने के कारण मरीज कम आ रहे है। घर से बाहर निकलते समय मास्क अवश्य लगाए।

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