इनेलो को मान्यता मिलने पर खड़े हुए सवाल, तो आयोग ने दिया चौंकाने वाला जवाब

इनेलो को मान्यता मिलने पर खड़े हुए सवाल, तो आयोग ने दिया चौंकाने वाला जवाब

इनेलो को मान्यता मिलने पर खड़े हुए सवाल, तो आयोग ने दिया चौंकाने वाला जवाब

News Josh Live, 12 Oct, 2020

हरियाणा में जिस समय जेजेपी पार्टी का गठन हुआ, उस समय कई वरिष्ठ नेताओं ने इनेलो पार्टी का साथ छोड़ दिया था, वो भी उस समय जब चुनाव सिर पर थे। इन वरिष्ठ नेताओं से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं ने भी दुष्यंत चौटाला की नई नवेली जेजेपी में आस्था जताई और पार्टी की डोर थाम ली। इस विश्वास का नतीजा आज सत्ता तक ले पहुंचा।

उस समय जब इनेलो के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने का लगातार ऐलान हो रहा था, तो हर किसी के मन में इनेलो के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे। क्योंकि पुरानी पार्टी है और पार्टी से चौटाला परिवार का भी राजनीतिक अस्तित्व जुड़ा है। लेकिन अब हरियाणा की राजनीति में इनेलो के अस्तित्व को लेकर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं। इसका एक कारण जजपा का गठन भी है।

दरअसल, क्षेत्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) की फाइल चुनाव आयोग को मिल नहीं रही है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में आयोग ने माना है कि मान्यता संबंधी आधिकारिक रिकार्ड वर्तमान में ट्रेस (उपलब्ध) नहीं हो पा रहा है।


वहीं, 19 अगस्त को पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने आयोग के पास RTI याचिका लगाकर एक जानकारी मांगी थी। इसमें तीन मुख्य बातें पूछी गई, जो कि-

■ किस वर्ष, महीने और तारीख को आयोग द्वारा इनेलो को मान्यता प्राप्त राज्य दल का दर्जा दिया गया।

■ किस लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर इनेलो को राज्य दल का दर्जा दिया गया।

इन दोनों बिंदुओं पर आयोग के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआइओ) एवं अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार ने जवाब दिया है कि उनके रिकार्ड में इस संबंध में फाइल ट्रेस नहीं हो पा रही है। जब भी फाइल उपलब्ध होगी, याचिकाकर्ता को सूचना दे दी जाएगी।

■  गत लोकसभा और विधानसभा चुनावों (2019) में इनेलो द्वारा निर्धारित संख्या से कम सीटें और वोट हासिल करने के चलते क्या आयोग द्वारा इनेलो की मान्यता के संबंध में समीक्षा की गई है ?

तो इस पर जवाब दिया गया है की इनेलो हरियाणा का मान्यता प्राप्त राज्य दल है एवं उसकी मान्यता जारी करने के सम्बन्ध में चुनाव चिन्ह (आरक्षण एवं आबंटन) आदेश, 1968 के पैरा 6 (सी )(2 ) को रैफर किया जाए.

वहीं, एडवोकेट हेमंत ने बताया कि नियमानुसार किसी भी राजनीतिक पार्टी को राज्य दल का दर्जा देने के लिए विधानसभा चुनावों में न्यूनतम छह फीसद वोट (6% Vote) और दो (2) विधानसभा सीटें जीतनी जरूरी हैं। अन्यथा विधानसभा की कुल सीटों की न्यूनतम तीन फीसद सीटें (3%) या तीन सीटें, जो भी अधिक हों, जीतनी जरूरी होती हैं।

कोई सीट न जीतकर भी कोई पार्टी कुल पड़े वैध वोटों का आठ फीसद हासिल करने पर भी राज्य दल के रूप में मान्यता मिल सकती है।

इसी तरह लोकसभा चुनाव में न्यूनतम छह फीसद वोट (6% Vote) और एक सीट जीतना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर कुल वैध वोटों का आठ फीसद (8%) हिस्सा पार्टी को मिलना चाहिए।

बता दें आपको कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में निर्धारित मानकों से कम वोट लेने के बावजूद नए नियमों के चलते इनेलो की मान्यता को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। अगस्त 2016 में चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए नए नियमों के अनुसार दो लोकसभा चुनावों और दो विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर ही संबंधित पार्टी की मान्यता पर फैसला किया जा सकता है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आज कोई खतरा इनेलो को नहीं है, तो आगे भी नहीं होगा। ऐसा हम क्यों कह रहे हैं, जरा विस्तार से समझियेगा-

गत वर्ष अक्टूबर, 2019 के हरियाणा विधानसभा आम चुनावो में भाजपा को प्रदेश में कुल पड़े वैध वोटों में 36.49 %  वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत 28.08% रहा। यानि भाजपा को 40 और कांग्रेस को 31 सीटें मिली (बड़ोदा से कांग्रेसी विधायक श्रीकृष्ण हूडा के देहांत के बाद ये 30 सीटें रह गई)। वहीं जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने 10 सीटें जीती, जबकि उसका वोट प्रतिशत 14.84 % रहा, जिसके चलते उसे भारतीय चुनाव आयोग द्वारा हरियाणा में मान्यता प्राप्त राज्य दल का दर्जा प्रदान करके चाबी का चुनाव चिन्ह आरक्षित कर दिया गया।

अब बात इनेलो की, तो उसे इन चुनावो में मात्र 2.44 %  ही वोट मिले और उसके इकलौते विधायक अभय सिंह चौटाला ही ऐलनाबाद सीट से विजयी हुए। इससे पूर्व गत वर्ष मई, 2019 में 17 वीं लोक सभा आम चुनावों में भी इनेलो को केवल 1.9 % वोट ही मिले एवं हरियाणा से उसका एक भी लोकसभा सांसद निर्वाचित नहीं हुआ।

एडवेकेट हेमंत ने वर्तमान चुनावी प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 1968 चुनाव चिन्ह आदेश के पैराग्राफ 6 ए के अनुसार किसी भी राजनीतिक पार्टी को मान्यता प्राप्त राज्य दल के रूप में दर्जा प्राप्त करने के लिए प्रदेश के विधानसभा आम चुनावो में कम से कम 6 प्रतिशत वोट और न्यूनतम दो सीटें (अर्थात विधायक ) जीतना आवश्यक है। अथवा विधानसभा की कुल सीटों की संख्या की कम से कम  तीन प्रतिशत सीटें या तीन सीटें , जो भी अधिक हों , जीतनी जरूरी होती हैं।

इसके अलावा कोई सीट न जीतकर भी कोई पार्टी कुल पड़े वैध वोटों का 8 प्रतिशत हासिल करने पर भी राज्य दल के रूप में मान्यता प्राप्त हो सकती है. इनेलो उक्त  तीनों निर्धारित पैमानों पर अक्टूबर, 2019 हरियाणा विधानसभा आम चुनावो में सफल नहीं रही।

जहां तक लोक सभा आम चुनावों में प्रदर्शन का विषय है, तो राज्य दल की मान्यता के लिए उनमें भी किसी पार्टी को कम से कम 6 प्रतिशत वोट और न्यूनतम एक सीट ( सांसद) का जीतना आवश्यक है अथवा कुल पड़े वैध वोटों का 8 प्रतिशत हासिल करने आवश्यक हैं। इनेलो गत वर्ष लोकसभा आम चुनावो में भी निर्धारित न्यूनतम वोट/सीटें हासिल नहीं कर पायी।

इस सबको देखकर प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या इनेलो पार्टी से मान्यता प्राप्त राज्य दल का दर्जा चुनाव आयोग द्वारा वापिस लिया जा सकता है, इस पर हेमंत ने बताया कि चार वर्ष पूर्व अगस्त 2016 में चुनाव आयोग द्वारा उक्त 1968  आदेश में डाले गए नए पैरा 6 सी, जो हालांकि 1 जनवरी 2014 से लागू माना गया, के अनुसार अगर किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (राष्ट्रीय और राज्य दल) को मान्यता प्राप्त होने वाले सम्बंधित लोक सभा आम चुनाव या विधानसभा आम चुनाव से आगामी होने वाले सम्बंधित लोक सभा/विधानसभा आम चुनाव में न्यूनतम वोट/सीटें प्राप्त नहीं होती, तो उसके राष्ट्रीय/राज्य दल के दर्जे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, हालांकि उससे आगामी लोक सभा /विधानसभा आम चुनाव के बाद उस राजनीतिक दल की मान्यता उन आगामी आम चुनावों में उसके प्रदर्शन पर अर्थात उसके द्वारा न्यूनतम सीटें/वोट हासिल करने पर ही निर्भर करेगी।

अब यह देखना होगा कि चूंकि इनेलो का प्रदर्शन मई, 2019 लोकसभा आम चुनावो में उपरोक्त निर्धारित पैमानों के अनुरूप नहीं रहा इसलिए क्या उसकी राज्य दल के रूप में मान्यता  अगले लोक सभा आम चुनावो अर्थात मई, 2024  में निर्धारित (या अगर उससे पूर्व हुए) 18 वीं लोक सभा आम चुनावो तक जारी रहेगी और उस आम चुनाव में इनेलो के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर उसकी राज्य दल के रूप में मान्यता जारी रखने या वापिस लेने का चुनाव आयोग द्वारा निर्णय लिया जाएगा अथवा ऐसा आकलन अक्टूबर, 2024 में ( या अगर उससे पूर्व हुए)

हरियाणा विधानसभा के अगले अर्थात 14 वें आम चुनावो में इनेलो के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर होगा ? अब यह  इस पर निर्भर करेगा कि इनेलो को सर्वप्रथम राज्य दल के रूप में मान्यता लोकसभा आम चुनाव या विधानसभा आम चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर चुनाव आयोग द्वारा प्रदान की गई थी, जिसकी आधिकारिक सूचना प्राप्त करने के लिए आयोग में आरटीआई याचिका दायर की गई.

 

 

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