MBBS की फीस बढ़ाने पर बोले सुरजेवाला, कहा- सरकार ने गरीब के बेटा-बेटी का डॉक्टर बनने का सपना तोड़ा

MBBS की फीस बढ़ाने पर बोले सुरजेवाला, कहा- सरकार ने गरीब के बेटा-बेटी का डॉक्टर बनने का सपना तोड़ा

MBBS की फीस बढ़ाने पर बोले सुरजेवाला, कहा- सरकार ने गरीब के बेटा-बेटी का डॉक्टर बनने का सपना तोड़ा

News Josh Live, 09 Nov, 2020

सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की फीस बढ़ाने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि खट्टर सरकार ने गरीब के बेटा-बेटी का डॉक्टर बनने का सपना तोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की फीस 40 लाख करना नया तुगलकी फरमान है। खट्टर-दुष्यंत सरकार के इस नए ‘तुगलकी फरमान ने हरियाणा के गरीब विद्यार्थियों का डॉक्टर बनने का सपना तोड़ दिया है। खट्टर सरकार आए दिन एक नया युवा विरोधी कदम उठाकर हरियाणा में अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों और गरीबों पर नित नए प्रहार कर रही है। अभी तक स्ष्ट वर्ग छात्रवर्ति के घोटाले की जांच पूरी नहीं हो पाई है और न ही कोई दोषी पाया गया है। उल्टा स्ष्ट छात्रों का नया वजीफा भी बंद कर दिया गया है।

सुरजेवाला, ने कहा कि इसी प्रकार से हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन में 14 से अधिक ‘पेपर लीक घोटाले हो चुके, जिस पर आज तक न किसी को सजा मिली और न ही कोई दोषी पाया गया। यही नहीं, खट्टर सरकार ने नौजवानों की नई नौकरियों में भर्ती पर पहले संपूर्ण प्रतिबंध लगा दिया तथा घोर विरोध के बाद प्रतिबंध तो वापस ले लिया पर वास्तविकता यह है कि हरियाणा के युवाओं को सरकारी नौकरियाँ नहीं दी जा रही। देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर भी हरियाणा में है, जो 33.5 प्रतिशत आंकी गई है। एक तरफ सरकारी नौकरियाँ नहीं और दूसरी तरफ स्कूल-कॉलेजों की फीस बेतहाशा बढ़ाई जा रही है।

सुरजेवाला, ने कहा कि  खट्टर सरकार ने अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में रूक्चक्चस् की पढ़ाई को अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्गों और गरीबों की पहुंच से बाहर कर दिया है। खट्टर सरकार सब गरीब विद्यार्थियों को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की ओर धकेलना चाहती है ताकि वो वहाँ दाखिला लें और प्राईवेट कॉलेज 18 लाख फीस तथा ऊपर की कमाई कर पाएं।


सुरजेवाला, ने कहा कि खट्टर सरकार का यह निर्णय युवा विरोधी व गरीब विरोधी है तथा प्राईवेट कॉलेजस की मदद के लिए किया गया है। इस षडय़ंत्रकारी फैसले को बगैर किसी देरी के वापस लिया जाना चाहिए। अगर खट्टर सरकार इसे वापस नहीं लेती तो उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।

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