हरियाणा में मौसम का बदला मिजाज, किसानों को बेहतर उपज के लिए रखना पड़ेगा इन बातों का ध्यान

हरियाणा में मौसम का बदला मिजाज, किसानों को बेहतर उपज के लिए रखना पड़ेगा इन बातों का ध्यान

हरियाणा में मौसम का बदला मिजाज, किसानों को बेहतर उपज के लिए रखना पड़ेगा इन बातों का ध्यान

News Josh Live, 26 Oct, 2020

हरियाणा में मौसम का मिजाज अब धीरे-धीरे बदलने लगा है। इस बदलते मौसम में अगर आप अपना ध्यान नहीं रख रहे हैं तो ध्यान देना शुरू कर दें क्योंकि गिरता तापमान आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। बता दें कि हिसार ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में ठंड अभी से असर दिखाने लगी है। हाल ये है कि यहां पहाड़ों के बराबर ठंड का लोगों को अहसास होने लगा है। तापमान की बात करें तो हिसार में अक्टूबर महीने का सबसे कम रात्रि तापमान शनिवार को दर्ज किया गया।

यहां न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जो कि सामान्य से पांच डिग्री कम दर्ज किया गया। मौसम में बदलाव को देखते हुए कई लोगों ने कूलर, एसी भी बंद कर दिए हैं। मौसम विभाग अनुमान अनुसार अभी तापमान में और गिरावट होने की संभावना बनती नजर आ रही है। इसमें अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हिसार की रात हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के बराबर ठंडी है। धर्मशाला में रात्रि तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

किसान इन बातों का रखें ख्याल-

सरसों की बिजाई- उन्नत किस्मों आरएच 725, आरएच 749, आरएच 30 , आर एच 406 इत्यादि के प्रमाणित बीजों से जल्दी पूरी कर लें। बिजाई से पहले 2 ग्राम कारबेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से अवश्य ही उपचारित करें।

देसी चने की बिजाई-  इसके लिए खेत को अच्छी प्रकार से तैयार करें। उन्नत किस्मों के साथ बिजाई शुरू कर दें। देसी चने की उन्नत किस्में बारानी व सिंचित क्षेत्रों के लिए एचसी 1 और एचसी 3 (मोटे दाने वाली किस्म) व एचसी 5 है। बिजाई से पहले बीज का राइजोबियम के टीके से उपचार जरूर कराए।

अन्य बीज उपचार: जड़ गलन बीमारी से बचाने के लिए 2.5 ग्रा. बाविस्टीन प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित जरूर करें। उखेड़ा रोग से बचाव के लिए बिजाई से पूर्व बीज का उपचार जैविक फफूंदीनाशक ट्राईकोडरमा विरिडी (बायोडरमा) 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज विटावैक्स 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें। यह प्रक्रिया राईजोबियम से उपचारित करने से पहले अवश्य करा लें।

गेहूं की बिजाई- इसके लिए अगेती बिजाई वाली उन्नत किस्मों के बीजों का प्रबंध कर लें। साथ ही खाली खेतों को अच्छी प्रकार से तैयार करें जिससे तापमान अनुकूल होने पर अगेती बिजाई शुरू की जा सके। अगेती बिजाई के लिए यदि अच्छा पानी उपलब्ध हो तो डब्लू एच 1105, एच डी 2967, एचडी 3086 व डब्लू एच 711 किस्मों के बीज को उपयोग में लाए। यदि कम पानी उपलब्ध हो तो अगेती बिजाई के लिए सी 306, डब्लू एच 1080 , डबलू एच 1142 किस्मों का प्रयोग में ला सकते है।

बता दें कि मौसम परिवर्तनशील रहने की संभावना के मद्देनजर सब्जियों व फलदार पौधों और हरे चारे की फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

नरमा कपास- कपास की चुनाई सूर्य निकलने के बाद ही शुरू करें। जिससे सुबह ओस के कारण उत्पादन की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का कोई असर ना पड़े। धान की कटाई व कढ़ाई करने के उपरांत पराली को भूमि में दबाएं व उर्वरा शक्ति बढ़ाएं व आगामी फसल का अधिक उत्पादन प्राप्त करें।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य में 29 अक्टूबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने वाला है। मगर मौसम खुश्क रहने की संभावना भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। क्षेत्र में कहीं-कहीं 25 अक्टूबर रात्रि व 26 अक्टूबर को आंशिक बादलवाई होने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान बीच-बीच में हवा चलने से तापमान में हल्की गिरावट होने की भी संभावना बन रही है।

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