हरियाणा में 4 नवंबर तक मौसम रहेगा खुशक, देखिए मौसम विभाग का बुलेटिन

हरियाणा में 4 नवंबर तक मौसम रहेगा खुशक, देखिए मौसम विभाग का बुलेटिन

हरियाणा में 4 नवंबर तक मौसम रहेगा खुशक, देखिए मौसम विभाग का बुलेटिन

News Josh Live, 30 Oct, 2020

हरियाणा राज्य में 4 नवम्बर तक मौसम आमतौर पर खुश्क रहने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान बीच बीच में हल्के बादल और धुंध जैसा मौसम भी बना रह सकता है। वहीं इस बदलते मौसम को कारण उत्तर पश्चिमी  हवाएं चलने से तापमान में हल्की गिरावट भी देखी जा सकती है।

मौसम आधारित कृषि सलाह-

तापमान अनुकूल होने की संभावना के मद्देनजर  गेहूं की बिजाई के लिए खेतों को अच्छी प्रकार से और समय परतैयार कर लें। साथ ही जहां अच्छा पानी उपलब्ध हो तो डब्लू एच 1105, एच डी 2967 ,एचडी 3086 व डब्लू एच 711 किस्मों के प्रयोग कर बिजाई शुरू कर दें। वहीं अगर कम पानी उपलब्ध हो तो अगेती बिजाई के लिए सी 306, डब्लू एच 1080 , डबलू एच 1142 किस्मों के प्रयोग किए जा सकते है।

बीज जनित बीमारियों से बचाव हेतु बिजाई से पहले 2 ग्राम वीटावैक्स या बाविस्टिन या फिर  थाइरम प्रति किलोग्राम बीज की दर से सूखा उपचार जरूर प्रयोग में लाएं।  साथ ही आपको जानकारी दें कें कि देसी चने की बिजार्इ के लिए खेत को अच्छी प्रकार से तैयार कर लें। उन्नत किस्मों बारानी व सिंचित क्षेत्रों के लिए एचसी 1 तथा सिंचित क्षेत्रों के लिए एचसी 3 (मोटे दाने वाली किस्म) व  एचसी 5  किस्मों का प्रयोग कर बिजाई पूरी करें। वहीं बिजाई से पहले बीज का राइजोबियम के टीके से उपचार करना ना भूलें।

अन्य बीज उपचार: जड़ गलन बीमारी से बचाव हेतु 2.5 ग्रा. बाविस्टीन प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करे। दूसरी ओर उखेड़ा रोग से बचाव के लिए बिजाई से पूर्व बीज का उपचार जैविक फफूँदीनाशक ट्राईकोडरमा विरिडी (बायोडरमा) 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज + विटावैक्स 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करें।

यह प्रक्रिया राईजोबियम से उपचारित करने से पहले कर लें-

अगर सरसों की बिजाई अब तक न कि गई हो तो उन्नत किस्मों आरएच 725, आरएच 749, आरएच 30 , आर एच 406 आदि के प्रमाणित बीजों से बिजाई इसी सप्ताह जल्दी से जल्दी पूरी कर लें। कारबेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से अवश्य उपचारित करें।

मौसम खुश्क रहने की संभावना के मद्देनजर सब्जियों व फलदार पौधों तथा हरे चारे की फसलों में जरूरतानुसार सिंचाई करें। अगर बात करें कपास की तो नरमा कपास की चुनाई सूर्य निकलने के बाद ही शुरू करें। जिससे सुबह ओस के कारण उत्पादन की गुणवत्ता पर प्रभाव न पड़े।

अगर धान को लेकर बताए तो धान की कटाई व कढाई करने के उपरांत पराली को भूमि में दबाये व उर्वरा शक्ति को बढाये व आगामी फसल का अधिक उत्पादन प्राप्त करे। सबसे अहम और जरूरी बात तो ये है कि किसान भाई फसल बेचने के लिए मंडी में मास्क अवश्य पहन कर रखे तथा सामाजिक दूरी बना कर रखे ताकि कोरेना से बचाव हो सके।

 

News Josh Live

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